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ख़ामुशी मेरी उड़ाकर रखदेगी नींद तुम्हारी रातों में

आजकल जोतुम कुछ बहकगए लगते हो कहीं जज़्बातों में
कभीतुम किसतरह खोये रहते थे हमारी हसीं मुलाक़ातों में

आज-कल जो तुमको रह नहीं ग

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