पाठ इल्मो-हुनर का पढाये तालीम,
सलीक़ा-ए-अदब सिखाये तालीम!

तहज़ीब-ओ-तमद्दुन होतीहै हासिल,
इन्सां को इन्सां से मिलाये तालीम!

© डॉ.एन.आर. कस्वाँ 'बशर' بشر