कभी नहीं गई नज़र मासूम की उनके किसी भी ऐब परभरोसा दिले-नादाँ को इतना उनके हर झूठ ओ फ़रेब परऐसा भी नहीं के हक़ीक़त ए अहबाब मालूम नहीं हमकोअज़ाब में हैंके दोस्ती अज़ीम बरक़रार है यकीं साहेब पर© dr. n. r. kaswan 'bashar' بشر ????