
मानाके ज़र्रा ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से
है मुक़म्मल हयात हमारी मां की दुआ करिश्माई से
हरेक सांस अहसास कराती है मां हैतो खुदा भी है
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मानाके ज़र्रा ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से
है मुक़म्मल हयात हमारी मां की दुआ करिश्माई से
हरेक सांस अहसास कराती है मां हैतो खुदा भी है