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असरात-ए-जज़्बात


दिमाग़ में अगर मुस्बत ख़्यालात डाले जाएंगे,हमारी हयात में वैसेही हालत नज़र आएंगे!मन्फ़ी सोच-ओ-फ़िक्र से बचने के साथ-साथ,हमारे असरात-ए-जज़्बात भी सुधर जाएंगे!

*मुस्बत ख़्यालात-सकारात्मक सोच, हयात-जीवन,मन्फ़ी-नकारात्मक, असराते जज़्बात-भावनात्मक असर।

© डॉ. एन. आर. कस्वाँ

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