जो जानता मैं कि तुम मेरी बांहों में हो अंतिम बार

तो मैं उस रात आलिंगन की हद को कम ना होने देता


अगर मैं जानता कि वो आख़िरी चुम्बन था

तो मैं तुम्हें चूमता समय के अंत तक


पता होता कि तुम फिर कभी मुड़कर देखोगी नहीं

तो मैं तुम्हें देखता अंतिम सांस के अंत तक


बताया होता कि तुम आख़िरी बार सुन रही हो मेरी कविता

तो मैं सुनाता वो कविता जो तुम्हें देखकर लिख पाता हूं


गर समझता कि वो रात काली रहेगी सदा के लिए

तो रोशन किया होता मैंने उसे तुम्हारा घूंघट उठाकर


जो मैं जान पाता कि तुम आख़िरी लडकी हो मेरे लिए

तो कोशिश करता मैं भी तुम्हारे लिए आख़िरी बनने की


ये इश्क़, इश्क़ ; ये इश्क़ है क्या या फिर दर्द था जानता

तो मरहम लेकर मैं जाता मिलने तुमसे उस रात


अगर ख़बर होती कि ये इश्क़ में होता ही है हरबार

तो मैं इश्क़ को परिभाषित करता एक आख़िरी बार ।

      - तुम्हारा नसीन...