आज फिर एक बार बैठा मैं उस जगह पर,देखा आसमान को फिर एक बार,पर इस बार जगह कुछ खाली भी थी,मैंने कहा टूटे होंगे कुछ तारे शायद,पर वो चांद था जिसकी कमी सी थी।