1 min read 788.9K reads

खोया चांद


आज फिर एक बार बैठा मैं उस जगह पर,देखा आसमान को फिर एक बार,पर इस बार जगह कुछ खाली भी थी,मैंने कहा टूटे होंगे कुछ तारे शायद,पर वो चांद था जिसकी कमी सी थी।

— S.H.Narsingani
Read more Earn more Learn more