राख़ चिता की ठण्डी होने पर उस शैतान की, अवशेष चुनने पहुंचे चौखट पर जब शमशान की, कहीं नन्हा सा,छोटा सा दिल धड़कता मिला उस राख़ में, जो पहचान था शायद उस शैतान में भी किसी इन्सान की ।