तेरा भी वक्त आएगा........



एक दिन चेहरा बेवजह मुस्कुरा जाएगा, तूं सबर कर.......

मसरूफ़ ज़माने में तेरा भी वक्त आएगा, तूं सबर कर.......



आज सुनता नहीं कोई ध्यान से तेरी बातें तो क्या हुआ.......

एक दिन किस्से अपने दुनिया को सुनाएगा, तूं सबर कर......



आज देखता नहीं कोई तेरी ओर इज़्ज़त से तो क्या हुआ......

एक दिन रुतबा ऊंचा तेरी पहचान बताएगा, तूं सबर कर.......



आज देता नहीं कोई तवज्जो तेरे कौशल को तो क्या हुआ......

एक दिन हुनर तेरा तुझको सम्मान दिलाएगा, तूं सबर कर.......



आज करना नहीं चाहता कोई भी बातें तेरी तो क्या हुआ.......

एक दिन यही जहां आदर से तेरे गुण गाएगा, तूं सबर कर......



आज दुतकार रहा हैं हर कोई तेरी हस्ती को तो क्या हुआ........

एक दिन इन सबको अपने कदमों में पाएगा, तूं सबर कर........



आज गुज़र रहा हैं मुश्किल दौर मायूसी का तो क्या हुआ.......

एक दिन लम्हा कोई संग कामयाबी लाएगा, तूं सबर कर........



सबर- सब्र



- नरेश कुशवाहा