शायद.......
मिजाज़ ए मौसम मुस्कुरा रहा हैं शायद.......
आज हमसे मिलने कोई आ रहा हैं शायद.......
आ रहा हैं शायद........ आ रहा हैं शायद........
बादलों की घटा काली, छा रही हैं दूर कहीं......
बह रहे हैं इन हवाओं में, प्यार के सूर कहीं.......
समां सुहाना सनम कोई ला रहा हैं शायद.........
आज हमसे मिलने कोई........
रंगों में भीगीं फूलों की, कलियां खिल रहीं.......
गुनगुनाते भंवरों से महकतीं चाहतें मिल रहीं......
मोहब्बत को करीब कोई पा रहा हैं शायद........
आज हमसे मिलने कोई.......
करता हैं इंतज़ार, कोई रात भर सोता नहीं........
कभी इश्क़ के सिवा, आलम ऐसा होता नहीं.......
महबूब के मन को कोई भा रहा हैं शायद.........
आज हमसे मिलने कोई.........
मिजाज़ ए मौसम मुस्कुरा रहा हैं शायद.......
आज हमसे मिलने कोई आ रहा हैं शायद.......
आ रहा हैं शायद........ आ रहा हैं शायद........
- नरेश कुशवाहा

