नारी


महकते इस जीवन की फुलवारी हूँ....

युगों के संघर्ष से न अबतक हारी हूँ....

निडर नयनों वाली मैं हिन्द की नारी हूँ....


सपनें सजाये, अरमान लिए कई मन में....

बनके बेटी ख़ुशी संग आती हूँ जीवन में....

संस्कारों से सजी हुई एक पहचान होगी....

सारे परिवार की बसी मुझमें जान होगी....

हाँ! सबकी लाड़ली, बाप की दुलारी हूँ....

निडर नयनों वाली मैं हिन्द की नारी हूँ....


रक्षा में भाई का राखी वाला हाथ मिला....

अच्छा-बुरा बतलाता माँ का साथ मिला....

स्वाभिमान को अपने न कभी सोने दूँगी....

बाबुल तेरे विश्वास को कम ना होने दूँगी....

नहीं हूँ कमज़ोर, हर दरिन्दे पर भारी हूँ.....

निडर नयनों वाली मैं हिन्द की नारी हूँ.....


नेक दुवाओं से किसीकी अर्धांगिनी बनी....

उसके प्यार से भरे दिल की मैं रानी बनी....

जीवन में संग उसके फ़िर आगे बढ़ने लगी....

ज़िन्दगी को अब मन लगाकर पढ़ने लगी....

सिखाया वक़्तने जो, उसकी आभारी हूँ.....

निडर नयनों वाली मैं हिन्द की नारी हूँ.....


दुनिया में माँ का रूप बड़ा अनोखा लगे....

सच्ची एक ममता, बाक़ी सब धोखा लगे....

शौर्य का कर सिंचन, पालन करूं प्यार से....

समझ खिलौना बच्चे मेरे खेले तलवार से....

वीरों की हूँ जननी, नहीं कोई बेचारी हूँ.....

निडर नयनों वाली मैं हिन्द की नारी हूँ.....


महकते इस जीवन की फुलवारी हूँ....

युगों के संघर्ष से न अबतक हारी हूँ....

निडर नयनों वाली मैं हिन्द की नारी हूँ....


हिम्मत है हथियार मेरा, समर्पण ही श्रृंगार है....

तप-त्याग की दौलत है, अभय मेरी हुंकार है....


- नरेश कुशवाहा