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किसान हूं मैं

किसान हूं मैं.......



ओ धरती के लाल...........

तूं बड़ा करता कमाल.........

रखे सबका खयाल.........

फ़िर बुरा क्यूं तेरा हाल.........




युगों की मेहनत से बना ये धरती की शान हूं मैं.......

बहाकर पसीना जहां को पालता किसान हूं मैं........



धोरी चलाता धरा पर, हल को बनाकर हथियार.......

अन्न उगाता सबके लिए, जग सारा मेरा परिवार..........

आलस की अंधेरी रात को मिटाता विहान हूं मैं........

               बहाकर पसीना जहां को......



महकती मिट्टी से रहे आबाद आने वालीं नस्लें........

मुस्कुराते इन खेतों में लहराए ख़ुशी की फसलें..........

परवरिश में इनकी रोज़ लगाता जी-जान हूं मैं.........<

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