ऐ दोस्त
पता होता पहले तो इस तरह गले नहीं लगते......
ऐ दोस्त तेरे इरादे हमें कुछ भले नहीं लगते.......
यार के लिए जान की बाज़ी भी लगाते हैं हम......
पर शायद तुम राह-ए-दोस्ती चले नहीं लगते........
सबको अपना ही मानकर इज़्ज़त देते हैं हम........
मगर अच्छी तहज़ीब में तुम पले नहीं लगते.......
अमन की राह पे भी खुद्दारी से चलते हैं हम.......
तुम पहले शिकस्त से इतने जले नहीं लगते........
सिर्फ़ हदें बढ़ाए न बढ़ता रुतबा जानते हैं हम........
मगर लिहाज़-ए-अदब में तुम ढ़ले नहीं लगते......
आंखें दिखाने वाले को पूरा देख लेते हैं हम........
लेकिन पहले कभी तुम हमें खले नहीं लगते......
चाह-ए-सुकून में जंगें लड़ना जानते हैं हम........
हमें डराने में तुने हाथ इतने मले नहीं लगते........
पता होता पहले तो इस तरह गले नहीं लगते......
ऐ दोस्त तेरे इरादे हमें कुछ भले नहीं लगते.......
- नरेश कुशवाहा

