दिवाली
महान विरासत हिन्द की, सभ्यता हमारी निराली हैं......
अमावस्या की रात आती दियों से रौशन दिवाली हैं.......
घर-आंगन सजी रंगोली में झलक रहे हैं मन के रंग.........
मिलकर बढ़ाने खुशियां सबकी, आये सारे एक संग.........
सज रही कृपा उपर, नीचे सज रही पूजा की थाली हैं.........
अमावस्या की रात आती..........
रिश्तों की मीठाश में भीगी हुई मीठी लगती मिठाई.........
एक दूजे का हैं जो प्यार दिलों में, बनाते उसे बधाई.........
चेहरों की ये मुस्कान, बिखेर रही ख़ुशी की लाली हैं........
अमावस्या की रात आती..........
महकती मानवता मन की, देती दुखियों को दिलासा........
विश्वास संजोए संग अपने, आंखों में चमके हैं आशा........
धनी बड़ा हैं ऊपरवाला, नहीं उसके खज़ाने खाली हैं.........
अमावस्या की रात आती..........
फैले देश के कोने कोने से, दियों का प्रकाश सुनहरा.........
बढ़तें चलें मिलकर आगे हम, संग में राम तेरी परंपरा........
जल जाएं दीपक से, हिन्द पर नज़रें जिनकीं कालीं हैं..........
अमावस्या की रात आती..........
महान विरासत हिन्द की, सभ्यता हमारी निराली हैं......
अमावस्या की रात आती दियों से रौशन दिवाली हैं.......
- नरेश कुशवाहा


