" आत्मनिर्भर भारत "
हैं नित पावन तेरे चरणारविन्द......
रहे कायम सदा मेरे प्यारे हिन्द.....
India को भारत बनाएंगे.....
मिलकर सब स्वदेशी अपनाएंगे......
(विश्वसनीय मैं.... आत्मीय हूं.....
शांतिप्रिय मैं..... भारतीय हूं.....)
व्यापारी विदेशी, बनाया था देश को गुलाम....
लूंटना था हिन्द को, तोड़े यहां उद्योग तमाम.....
विरासत को बिखेरने के थे उनके सारे काम.....
आज़ादी के ऊंचे, हमने चुकाए हैं दाम......
सोये स्वाभिमान को जगाएंगे........
मिलकर सब......
ऋषियों की महेनत हैं योग-औषधि का ज्ञान......
कला और साहित्य का हमारे जग में हैं मान.......
वेद-वेदांग, उत्सव-संस्कार हैं हिन्द की शान.......
भारतने कराया दुनिया को सभ्यता का भान.......
जहां में तिरंगा प्यारा लहराएंगे........
मिलकर सब.......
बहुत दिया हैं भगवानने, नहीं हैं हम लाचार.....
जग की जरूरतों का बने अब भारत आधार......
बातों का सभी समझना हैं हमें इतना ही सार......
स्वदेशी से होगा जगतगुरू का सपना साकार.......
संसार को राह नई दिखाएंगे.......
मिलकर सब.........
India को भारत बनाएंगे.....
मिलकर सब स्वदेशी अपनाएंगे......
(विश्वसनीय मैं.... आत्मीय हूं.....
शांतिप्रिय मैं..... भारतीय हूं.....)
आत्मनिर्भर भारत.. जय हिन्द, जय भारत।
- नरेश कुशवाहा


