ज़िन्दगी से दूर कब तक जाओगे किस तरह सच्चाई को झुटलाओगे सादगी इतनी मियाँ अच्छी नहीं ज़िन्दगी में रोज़ धोका खाओगे तल्ख़ यादें  दिल से  मिटती ही नहीं ज़िन्दगी में चैन कैसे पाओगे