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क्या सबब था


क्या सबब था,किस लिये दुनिया से मैं डरता रहा, सर झुका कर जिसने जो भी कह दिया करता रहा सी दिया था मेरे होटों को ज़माने ने मगर, ज़िक्र सुब्ह-ओ-शाम तेरा फिर भी मैं करता रहा

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