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बचपन


नाराज होने के लिए,कोई अपना ढूँढ़ रहा हूँ।कोई मनाये मुझे भी,ये बहाना ढूँढ़ रहा हूँ।बड़े हुए तो बरसों हो गए,मैं आज भी खुद में,बचपना ढूँढ़ रहा हूँ।।

— नंदसाय यादव
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