कुछ जिया ,कुछ एहसास किया
समय को हमने बिता दिया
जितना सुन के सीखा, याद रहा
जो पढ़ा वो ज़ेहन में बिठा लिया
बनाया किताबों को सहेली
तब लगा कुछ अच्छा काम किया
बैठी कोने में और
किताबों को चारों ओर फ़ैला लिया
सुकून न मिला जब कहीं,
हाथ में लेकर किताब
ख़ुद को दूसरी दुनिया में घूमा दिया
किताबों के साथ ख़ुद की दुनिया को बसा लिया

