बातें करनी छोड़िं थी तुम्हें भुलाने के लिए, 

पर यादें फिर से ताज़ा हो गईं तुम्हारे आने से,

तुमसे मिलने के बाद अब लगता है तुम्हें कभी भूल नहीं पाऊँगी,

सिर्फ हाँ ही़ कहूँगी अब तुम्हारे चले जाने के बाद,

       

यूँ बार बार तेरा साथ बैठना याद आ रहा है,

जाने क्यों तुमसे फिर मुलाकात का ख़्याल आ रहा है,

      

तुम्हारी यादों में अब लगता है शायर ही बन जाऊंगी,

कि बीना लफ़्ज़ो के बस युँ हिं लिखती जाउंगी,

     

लो मान लिया आज मेरे दिल ने भि ये,

कि कुछ तो था हमारि उस पहली मुलाकात में।।