मैं शापित हूँ
पाँव के छालों और
खाली पेट-तंत्र के मरोड़ों को
साथ लिए हजारों कोस पैदल
सड़क पर चल रहे
रीढ़ की हड्डियों के लिए
रीढ़विहीन सत्तासीनों से, अपेक्षा हेतु।
मैं शापित हूँ
सिंहासन पर छप्पन भोग सजाने वाली
अमिट स्याही लगी उँगलियों को
छप्पन भोग सनी उँगलियों से
सादी रोटी के हक़ का
गुहार लगाते देखने के लिए।
मैं शापित हूँ
शहर के शिल्पकारों, हुनरबाजों
और कारीगरों को
शहर के उपभोगी लुटेरों से
रक्षा का घोषणा-पत्र पढ़ते हुए
देखने को।
मैं शापित हूँ
देशी, चायनीज, कॉन्टिनेंटल
इटालियन फ़ूड कांटेस्ट की होड़ में
एसी-कूलर की मलय-समीर के साथ
टेलीविजन पर धूप में लाठी खाई
पीठ के बनते अचार पर
चटकारे लेने के लिए।
मैं शापित हूँ
ट्रेन की पटरियों, सड़कों और
महामारी के चपेट में आने वाली
भूख की अधकचरी मौत के लिए
संताप के शोक-गीत गायन के बदले
गृह-प्रेम-व्यूह में सर्वस्व होम को।
मैं शापित हूँ, शापित हूँ मैं।


