
खिंची है दीवार यहाँ,धर्म और जाति की जो,
ऐसे सारे बंधनों को तुम अब तोड़िए।
फैलाया रगों में विष,जिनके आतंक ने जो,
ऐसे चण्ड-मुण्डों का उद्दण्ड तुम तोड़िए।
घायल
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ऐसे सारे बंधनों को तुम अब तोड़िए।
फैलाया रगों में विष,जिनके आतंक ने जो,
ऐसे चण्ड-मुण्डों का उद्दण्ड तुम तोड़िए।
घायल