जाम अक्सर मयखाने में छलकते है,दर्द अक्सर आईने में झलकते है,और महफ़िलो से रुखसत इसकदर हुए हैं हम,कि अब बस श्मशानो में ही भटकते है।
जाम अक्सर मयखाने में छलकते है,दर्द अक्सर आईने में झलकते है,
और महफ़िलो से रुखसत इसकदर हुए हैं हम,कि अब बस श्मशानो में ही भटकते है।