इस हद से ज्यादा तेज भागती जिंदगी में कभी दो पल का विराम लेके सोचा है कि हम प्रकृति से कितने परे हो रहे हैं? कभी देखा हैं इस आधुनिकता की चमक के आगे हमारी प्रकृति कितनी झाँखी पड़ रही है? अक्सर चले जाते हैं लोग सुबह-शाम रेस्टोरेन्ट में, पर क्या उन्ही लोगो के पास दो पल गार्डन में बैठकर प्रकॄति को निहारने का समय हैं? क्या वीडियो-गेम्स, टेलेविज़न में उलझे आज के बच्चे, खुले हरियाले मैदान में जाके खेलने के आदि हैं? गार्डन में बैठकर योग-कसरत करने के बजाय, पैसे देके जिम में पसीना बहाने के लिए लोगो का प्यार बढ़ रहा हैं हमारा प्रकृति के प्रति लगाव कम हो रहा है हम पर्यावरण की सुंदरता को निहारना भूल रहे हैं हम भूल रहे हैं कि पर्यावरण से ही हमारा जीवन हैं भूल रहे हैं कि प्रकॄति से परे हो हम विनाश की और ही जा रहे हैं हम प्रकृति से परे हो रहे हैं...!