वो उन फूलों की तरह हैं जो खिलते तो हैं...
पर कभी मुरझाते नही वो उस सूरज की तरह है
जिसका उदय तो होता हैं...
पर कभी अस्त नही होता
वो उस दीपक की तरह है जिसको जलाया तो जा सकता हैं...
पर कभी बुझाया नही जा सकता
वो उस सितार की तरह है
जिसके साज को छेड़ा तो जा सकता है...
पर कभी किसी से धुन नही बनायी जाती
वो उस रेत की तरह है जिस पर कोई भी चल सकता हैं...
पर अपने निशाँ नही छोड़ सकता
वो उस ऋतु की तरह है
जिस में बहार तो आती हैं...
पर कभी पतझड़ नही आता वो
उस दरिया की तरह है
जिस में पत्थर तो फेंका जा सकता है...
पर उसके पानी को नही हिलाया जा सकता...!