
आज एक ख्याल आया हैं ख़ुद के बारे में
किस तरह निजात पा लिया है खुद से में ने
दुसरो का ख्याल करने मैं
फिर जब खुदको निहारा आईने में झुक गये ये नैन
नही मिला पायी खुद से
खुद का दर्द छुपा दिया था कही दुसरो को हंसाने मैं
दर्द वो उभर आया है आज
भीग रही हूँ और ज्यादा
खुद के सवालों की बारिश मे
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