आज एक ख्याल आया हैं ख़ुद के बारे में किस तरह निजात पा लिया है खुद से में ने दुसरो का ख्याल करने मैं फिर जब खुदको निहारा आईने में झुक गये ये नैन  नही मिला पायी खुद से खुद का दर्द छुपा दिया था कही दुसरो को हंसाने मैं दर्द वो उभर आया है आज भीग रही हूँ और ज्यादा खुद के सवालों की बारिश में नही ऐसा कोई पल बिते कल में मेरे जिसको सोच कर में आज मुस्कुराऊँ नही जिया खुद के लिए कभी दुसरो के लिए जिने में जी चाहता है खुदको सजा दू पर सोचती हूँ कि आज तक यही तो किया हैं में ने सवाल ये भी हैं क्योँ ये ख्याल आया है आज ? पर जवाब यही हैं कि बस ख्याल आया है खुद के बारे में आज..!