एक नसीहत खुद को दो,

 कर्मों का विश्लेषण करो ,

ना हारो , ना जीतो , 

जब बात अपनों की हो तो समझकर लो, 

आज मन खराब है ,

रिश्तों में खटास है , 

दिल में धड़कन बढ़ रही , 

दुख बेहिसाब है ,

पर कभी तो नई शुरुआत करो ,

पहले आप नहीं पहले मै से सुलह का आगाज करो , 

कभी किसी को माफ करो तो कभी मुस्कुराकर बात को टाल दो ।

उस बिछड़े रिश्ते को फिर से बांध लो ,

जो हाथ छूटे थे फिर से उनको थाम लो , 

रंजिशो की पोटली बनाकर बहा दो , 

जो थी खटास मन में उसमें चाशनी की परत लगा दो , 

दिल की खामोशी को आज तुम बयान करके फिर से उस दोस्त के साथ चाय पर चर्चा का विषय बना दो , अरे सुनो जो सामने दिख जाए वो पुराना प्रेमी तो थोड़ा देखकर मुस्कुरा दो।

अरे खुस्पुसाकर दिल-ए-नादान को समझा दो ,

वो सच्ची मोहब्बत थी , अधूरी ही अच्छी है  , 

मेरी ना सही किसीकी कहानी तो पक्की है ।

एक नसीहत खुद को दो ,

कर्मों का विश्लेषण करो ,

ना हारो , ना जीतो , 

जब बात अपनों की हो तो समझकर लो।।