जिस टूटे हुए पत्ते को फिजूल समझ कर फेंक दिया था हमने...
बरसात में एक चींटी को उसी पत्ते ने सहारा दिया...
अर्थात- हमारी जिंदगी में सबकी अपनी-अपनी महत्वता होती है, इसलिए किसी को भी व्यर्थ समझकर छोड़ नहीं देना चाहिए...
-नैना कौर


जिस टूटे हुए पत्ते को फिजूल समझ कर फेंक दिया था हमने...
बरसात में एक चींटी को उसी पत्ते ने सहारा दिया...
अर्थात- हमारी जिंदगी में सबकी अपनी-अपनी महत्वता होती है, इसलिए किसी को भी व्यर्थ समझकर छोड़ नहीं देना चाहिए...
-नैना कौर