तरजीह की नहीं जिंदगी मोहताज मेरी,मेरा खुद का एक वजूद है!नाम भी है और रुतबा भी है,पर तेरे इश्क का छाया मुझ पर फितूर है!
तरजीह की नहीं जिंदगी मोहताज मेरी,मेरा खुद का एक वजूद है!
नाम भी है और रुतबा भी है,पर तेरे इश्क का छाया मुझ पर फितूर है!