11 जून 1897 में,

एक ऐसे क्रांतिकारी का जन्म हुआ...

इतिहास और साहित्य में,

बिस्मिल जिनका नाम हुआ...


बाल्यकाल की शिक्षा में,

उ से उल्लू का विरोध किया...

थक हारकर पिता ने,

उर्दू स्कूल में दाखिला किया...


किशोर अवस्था में वे,

बुरी आदतों के हुए थे आदी...

परंतु सत्यार्थ प्रकाश नामक पुस्तक ने,

उनके जीवन की दिशा ही बदल डाली...


19 वर्ष की आयु में,

क्रांतिकारी मार्ग में कदम रखा...

11 वर्ष के क्रांतिकारी जीवन में,

11 पुस्तकों को प्रकाशित किया...


मैनपुरी षडयंत्र की,

घटना में वो शामिल थे...

रिपब्लिकन एसोसिएशन के

सदस्य के रूप में वो संगी थे..


काकोरी कांड की घटना से,

अंग्रेजी पुलिस ने गिरफ्तारी की...

19 दिसंबर 1927 को,

उन्हें फांसी की सजा दी...


30 साल की उम्र में,

वे जिंदगी का बलिदान दे गए...

गोरखपुर की जेल में,

बिस्मिल शहीदी का जाम पी गए...


अंग्रेज जेलर उनके व्यक्तित्व को देखकर,

खुद को रोक ना पाया कहने से...

राष्ट्रपति या सेना अध्यक्ष का होता पद,

जो बिस्मिल किसी और देश या समय में होते...


-नैना कौर