मंज़िल की तलाश में, घर से तो निकल पड़े...

अनजानी राहों पर, अकेले ही सही, चल तो पड़े...

मुकाम आए या ना आए, पाने की उम्मीद तो है...

पर वो मंजिल क्या पाएंगे, जो घर पर ही है खड़े...


-नैना कौर / @NainaKaur1101