माँ तुझसे ज्यादा मुझे, और कौन प्यार कर सकता है?
मेरी नादानियों पर भी, और कौन मुस्कुरा सकता है?
सारी रात जाग कर, मुझे और कौन सुला सकता है?
खुद गीले में सोकर, मुझे कौन सूखे में लेटा सकता है?
धूल मिट्टी से भरा हूँ, फिर भी कौन गले लगा सकता है?
खुद गंदा हो कर, मुझे और कौन नेहला सकता है?
मेरे लिए अपनों से ही, और कौन लड़ सकता है?
मुझे चोट लगने पर, और किसका दिल दुख सकता है?
मुझे रोता देखकर, और कौन रो सकता है?
भूखा देखकर मुझे, और कौन तड़प सकता है?
जो फिसल जाऊं तो प्यार से, और कौन संभाल सकता है?
जो गिर जाऊं तो हाथ देकर, कौन उठा सकता है?
सही रास्ता जिंदगी का मुझे, और कौन दिखा सकता है?
माँ एक तू ही तो है, जिसके बिना संसार कहां चल सकता है?
माँ तेरी गोद की तरह, कहां और कोई दूसरा सिरहाना बन सकता है?
माँ तेरे आंचल की खुशबू के जैसे, कहां कोई परफ्यूम बना सकता है??
-नैना कौर /@NainaKaur1101


