बसर रही है जिंदगी हमारी,दुनिया की परवाह करने में...खुद के लिए हम कहां जिए,सोचकर, कि लोग क्या सोचेंगे..?
बसर रही है जिंदगी हमारी,दुनिया की परवाह करने में...
खुद के लिए हम कहां जिए,सोचकर, कि लोग क्या सोचेंगे..?