
खुली हवा क्या होती है,
हम लड़कियों ने तो कभी जाना ही नहीं...
पैदल हो या स्कूटी पर,
स्कार्फ बांधना तो हम कभी भुले ही नहीं...
सांस ना भी लेते बने स्कार्फ में,
तो भी बांधना पड़ता हैं...
कोई भी ऐरा गैरा इश्क ना कर बैठे,
इसलिए इस चेहरे को छुपाना पड़ता हैं ...
चलो ना करे इश्क पर,
उनके कमेंट से भी डरते हैं...
फिर दिन भर सोच-सोच कर,
डिप्रेशन में दिन गुज़ारा करते हैं...
मां को बताते तो कहती,
तुझे स्कार्फ बांधकर जाना चाहिए था...
और पापा को बोलो तो कहते,
तुझे बाहर जाना ही नहीं चाहिए था...
हम तो जैसे एक कैदी हैं,
जिन्हें कपड़े के पीछे चेहरा छुपाना पड़ता हैं..
ताकि कोई कुछ बोल ना दे,
इसलिए अपनी ही पहचान को छुपाना पड़ता हैं...
क्या करें मजबूरी जो हैं,
डर नहीं है पर घबराहट
Read More! Earn More! Learn More!
