खुर्शीद से तू कर दोस्ती, चांद से क्या कीजै रे..?
खुद में तू कर रोशनी, औरो से क्या लीजै रे..?
अर्थ- खुर्शीद (सूरज यानी खुदा) की खुद की रोशनी होती है, अगर दोस्ती करना है तो सूरज से कर...चांद (दुनियावी चीजें, मनुष्य इत्यादि) से दोस्ती करके तुझे क्या फायदा? जो खुद ही रोशनी के लिए सूरज पर निर्भर है।
सूरज (खुदा) से दोस्ती करके तू सूरज (खुदा) जैसा बन जाएगा, तुझमें रब्बी गुण (खुदा के गुण) पैदा हो जाएंगे... और जो चांद (मनुष्य, अन्य पदार्थ) से दोस्ती करेगा, तो हमेशा दूसरों पर ही निर्भर रहेगा (अर्थात जो खुद ही दूसरों पर निर्भर है, उनसे मांगकर क्या करेगा?)।
-नैना कौर ग्रोवर


