कैसी यह कविशाला है..?

कविताओं का लगा जैसे कोई मेला है...

दिल उसका भी लग जाता यहां...

जो ज़िदगी में अकेला है...


सभी तरीके की कविताएं...

मुफ्त में यहां देते हैं...

और लोग पढ़कर इन कविताओं का...

भरपूर लुत्फ लेते हैं...


जो तुम नहीं भी हो शायर...

तो बन जाओगे यहां पढ़कर...

जो लिखना तुम्हें कुछ आता है...

तो उसकी भी है कद्र यहां पर...


तो आ जाओ सभी मिलकर...

कविशाला को आगे बढ़ाएं...

और अपने इस हुनर को...

इस दुनिया के सामने दिखाएं...


-नैना कौर