कलम नहीं छोड़ी मैंने, ना स्याही खत्म हुई है
बस विचारों पर अपने मैंने, रोक लगाई हुई है
दिल चीखता है मगर, आवाज दबाई हुई है
कुछ ना कहने की मैंने, कसम जो खाई है
कभी झूठ नहीं कहा, कही हमेशा सच्चाई है
पर जब भी सच बोला, औरो को तकलीफ ही पहुंचाई है
क्योंकि, शब्दों ने मेरे, तो बस कमान ही चलाई है
अब चुप रहकर ही शायद, उस दर्द की भरपाई है
पर सच छुपा रहे, यह भी तो अन्यायी है
इसलिए फिर मैंने, अब कलम उठाई है
शब्दों से अपने मैंने, फिर कमान चलाई है
कसम टूटे तो टूटे, पर कहनी मैंने सच्चाई है
-नैना कौर / @NainaKaur1101


