जिउ मछली बिन नीर ना जीवै ।
तिउ प्राणी बिन मूल मर जावै ।
अर्थात->
मछली का मूल (आधार) पानी होता है... जब तक वह पानी में है, वह जीवित रहेगी... परंतु जैसे ही हम उसे बाहर निकालते हैं तो वह मर जाती है, क्योंकि वह अपने मूल से टूट जाती है ।
वैसे ही मनुष्य के जीवन का आधार है आपसी प्रेम, दया भाव... और यदि उसमें यह नहीं है तो वह एक मृत शरीर के समान ही है, क्योंकि जहां प्रेम और दया है वही परमात्मा का निवास है... और जहां परमात्मा निवास नहीं करते, वह है मृत शरीर ।
-नैना कौर


