उसने कहा ख्वाब लिखो,
मैंने कहा इतिहास लिखूंगी...
उसने कहा घुंघट ले लो,
मैंने कहा बेखौफ चलूंगी...
उसने कहा आँखें झुका लो,
मैंने कहा सर उठा कर चलूंगी...
उसने कहा कंगन पहन लो,
मैंने कहा हर जंजीरे तोड़ दूंगी...
उसने कहा पायल पहन लो,
मैंने कहा बेड़ियों से मुक्त होऊँगी...
उसने कहा काजल लगा लो,
मैंने कहा तिलक लगाऊँगी...
उसने कहा बाली पहन लो,
मैंने कहा बलि चढ़ाऊँगी...
उसने कहा बेलन पकड़ लो,
मैंने कहा शमशीर उठाऊँगी...
उसने कहा भोजन पका लो,
मैंने कहा शस्त्र चलाऊँगी...
उसने कहा साड़ी पहन लो,
मैंने कहा कवच पहनूंगी...
उसने कहा चार दीवारों में रहोगी,
मैंने कहा शत्रु का सीना चीरूंगी...
उसने कहा सती बनोगी,
मैंने कहा वीरांगना कहलाऊँगी...
-नैना कौर / @NainaKaur1101


