घंटों बैठ, तारों को निहारने लगी हूँ...
चाँद की रौशनी, खुद में समाने लगी हूँ...
इन अंधेरों से मुझे, इश्क सा हो गया है...
सारी रात जागकर बिताने अब लगी हूँ...
मोहब्बत नहीं किसी गैर से मुझे,
खुद में ही मैं डूब जाने लगी हूँ...
तन्हा नहीं इन अंधेरी रातों में भी मैं,
क्योंकि खुद से वफा जो निभाने लगी हूँ...
-नैना कौर /@NainaKaur1101


