चाहत नहीं मुझे किसी की ,

मैं खुद से प्यार करने लगी हूं...


शीशे में अक्स को देखकर,

खुद से इज़हार करने लगी हूं...


अपनों की बेवफाई को सहकर,

खुद की परछाई के साथ रहने लगी हूं...


मौत का अब नहीं मुझे कोई डर,

मैं जिंदगी को जी भर के जीने लगी हूं...


-नैना कौर