मां, भूख लगी है खाना दो...
बेटा, घर में कुछ नहीं है खाने को...
मां, पैसे दो कुछ लेकर आऊं...
बेटा, पैसे भी मैं कहां से लाऊं..?
मां, पापा को बोलो ना पैसे लाएंगे...
बेटा, पापा को बुखार है, कैसे जाएंगे..?
मां, तुम जाओ ना लेकर आना...
बेटा, मुन्नू को है मुझे संभालना...
ठीक है मां, मैं ही जाता हूं...
थोड़े बहुत पैसे कमा कर लाता हूं...
बेटा, तुम तो छोटे हो...
तुम कैसे पैसे ला सकते हो..?
मां, मैं मजदूरी करूंगा...
और थोड़े बहुत पैसे जरूर लाऊंगा...
नहीं बेटा, तुम मत जाओ...
तुम बस मुन्ने को खिलाओ...
मैं जाकर करती हूं काम...
पैसो का कुछ तो हो ही जाएगा इंतजाम...
नहीं मां, तुम रहने दो...
और मेरे आने का इंतजार करो...
इतना कहकर बेटा चला जाता है...
और शाम को कुछ पैसे कमा कर लाता है...
अब आप ही बताओ वह क्या करें..?
अपनी मुश्किलों को दूर कैसे करें..?
बातों से कुछ नहीं होगा...
आपको थोड़ा समझना होगा...
उसकी मदद करनी होगी...
तभी उसकी जिंदगी सवरेगी...
हक उसका दिलाना होगा...
और उसे आगे बढ़ाना होगा...
स्कूल उसे भी जाना है...
मजदूरी उसे भी नहीं करना है...
पर मजबूरी के आगे वह बेबस है...
क्योंकि घर में पैसे की किल्लत है...
-नैना कौर


