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अपनों के ही अल्फाज़ होते


अपनों के ही अल्फाज़ होते...जो दिल-ओ-ज़ेहन में घर कर जाते...

वरना गैरों की क्या मज़ाल...जो दर्द-ए-दिल दे पाते...

— नैना कौर
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