अपनों के ही अल्फाज़ होते...जो दिल-ओ-ज़ेहन में घर कर जाते...वरना गैरों की क्या मज़ाल...जो दर्द-ए-दिल दे पाते...
अपनों के ही अल्फाज़ होते...जो दिल-ओ-ज़ेहन में घर कर जाते...
वरना गैरों की क्या मज़ाल...जो दर्द-ए-दिल दे पाते...