जीवन राज़ है गहरा देखो, कल की कुछ भी खबर नहीं है
कल क्या होगा हमें पता हो, जीने का फिर मजा नहीं है...
जीवन बीता खोज-खोज के, हाथ में कुछ भी लगा नहीं है
पाया तू ने जो कुछ उसका, करना क्या है पता नहीं है...
रिश्ते - नाते टूटें तो, जुड़ने में वो मजा नहीं है
क़िस्मत ने भी बांध रखा है, वरना हम लाचार नहीं है...
तुम बिन दिन अब बीत रहे हैं, मिलने के आसार नहीं है
जीवन गुजरा इंतजार में, चमत्कार का पता नहीं है...
गिरते-गिरते संभल गए हैं, गिरना अब स्वीकार नहीं है
आने वाले तूफानों को, अपनी हिम्मत पता नहीं है...
जीवन जीना हंस-हंस के, गया समय फिर रुका नहीं है
ग़म न करना खोने का, रोने से कुछ मिला नहीं है...
जब मान लिया उनको अपना, हमको भी शिकवा नहीं है
साथ निभाना जीवन भर का, फिर कोई भी ग़िला नहीं है...
जीवन राज़ है गहरा देखो, कल की कुछ भी खबर नहीं है...
- नईम मोहम्मद -


