ख़ाली जगह
लोगों की भीड़ में, अक्सर तनहा रहता हूँ
दोस्तों की गुफ़्तुगू में, खामोशियाँ मैं सुनता हूँ
पेड़ के पत्तों के बीच, आसमान मैं देखता हूँ
घडी के लम्हों में, सन्नाटे को भी सुनता हूँ
अक्सर गीतों में बसी, ख़ामोशी मैं सुनता हूँ
गानेवालों की भीड़ में, सुनने वालों को ढूंढ़ता हूँ
भीड़-भाड़ की इस दुनिया में ख़ाली जगह में ढूंढता हूँ
इस जिस्मानी काइनात में रूहानियत तरसता हूँ
- नैमिष

