मेरी स्वास प्रस्वास के मध्य

रिक्त स्थान में है,

तुम्हारा स्थान ।

तुम जोड़ती हो एक सांस को 

दूसरी सांस से 

और तुम्हारे होने के एहसास से ,

जीवन का हर अधूरापन ,

हो जाता है पूर्ण ।

फिर शेष नहीं रहती कोई इच्छा 

तुम्हे पा लेने के सिवा ।


मुदित पाण्डेय ' नैमिष '