देखे हुए कुछ ख्वाब निगाहों में झर गए
जब जिक्र बिछडने का हुआ हाय डर गए
वो शक्स जिसे मैंने बनाया था खुद़ा
वो दिल से उतरे फिर निगाहों से उतर गए
किस्मत पे मुझे एतबार था नहीं या रब्ब
क्या अपने क्या पराये बखूबी मुकर गए
तु आये या ना आये किसे आरज़ू रही
जज्बात जो थे दिल में कब के ही मर गए