"वो गलियां तुम्हें बुलाती हैं जिन गलियों से तुम गुजरे थे,


छम छम पायल की खनक लिए जिन गलियों से तुम गुजरे थे,


चांदनी सा रूप लिए जिन गलियों से तुम गुजरे थे,


मस्त हवा में खुला केश लिए जिन गलियों से तुम गुजरे थे,


प्यार का पूरा कोष लिए जिन गलियों से तुम गुजरे थे,


अदभुत अदम्य सा साज लिए जिन गलियों से तुम गुजरे थे,


सूरज सा तेज लिए जिन गलियों से तुम गुजरे थे,


बहकती अदा के नखरे लिए जिन गलियों से तुम गुजरे थे,


गुलशन की सुंदर पक्षी सी जिन गलियों से तुम गुजरे थे,


सावन की रिमझिम बारिश सी जिन गलियों से तुम गुजरे थे,


फुलवारी की सुंदर फूल सी जिन गलियों से तुम गुजरे थे,


वो गलियां तुम्हें बुलाती हैं जिन गलियों से तुम गुजरे थे ।"