वह पथिक क्या जो लक्ष्य से अपना वास्ता बदल दे,

जरा सी भीड़ को देख अपना रास्ता बदल दे,

टूट गई है नाव तो संभाल उसे अपने तजुर्बे से,

वह नाविक क्या जो अपनी पतवार बदल दे,

हौंसले बुलंद कर जोर से आवाज लगा तू,

जरा सी शोर देख तू न अपनी आवाज बदल दे,

अगर आसमान है उड़ान तेरी तो पार कर सभी हदों को,

दो चार चील कौवों को देख तू मत अपनी उड़ान बदल दे,

पहुंचेगा तू मंजिल पर गर तेरा हौंसला बुलंद है,

लांघ जा सरहदों को तू यू न अपनी उछाल बदल दे ।