तुम्हें पाने की इच्छा में हमने मीलों का सफर किया,

खुद को खुद से दूर किए कई साल बीत गया,


मुझे बुलाने की खातिर मेरी गलियों ने आवाज दिया,

चहचहाती चिरईया खेलता बचपन मुझसे पीछे छूट गया,


स्तब्ध हु हैरान हूं तुम्हारी खातिर कितनों को दूर किया,

तुम भी तुम न रही शायद यह बद्दुआ है उनकी जिनको हमने भुला दिया।


विश्व कविता दिवस ❤️